Life Shayari Archive

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था
एक नाई, एक मोची, एक काला लुहार था

छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार था
कही भी रोटी खा लेते, हर घर मे भोजऩ तैयार था

बाड़ी की सब्जी मजे से खाते थे जिसके आगे शाही पनीर बेकार था
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार था

नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था
छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

अपना घड़ा कस के बजा लेते
समारू पूरा संगीतकार था

मुल्तानी माटी से तालाब में नहा लेते, साबुन और स्विमिंग पूल बेकार था
और फिर कबड्डी खेल लेते, हमे कहाँ क्रिकेट का खुमार था

दादी की कहानी सुन लेते,कहाँ टेलीविज़न और अखबार था
भाई -भाई को देख के खुश था, सभी लोगों मे बहुत प्यार था

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

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वो एक शक़्स मुझे अपने क़रीब लगता है
खुद से करूँ जुदा तो अजीब लगता है

ये बेक़रारी, ये बेचैनी, ये कशिश कैसी
उसका मिलना मुझे अपना नसीब लगता है

कभी मीठी सी बातें, कभी हर बात पे झगड़े
ये याराना बड़ा दिलचस्प, बे-तरतीब लगता है

मोहब्बत की मंज़िल का पता न मिल सके फिर भी
कई सदियों का रिश्ता ये मेरे हबीब लगता है

उसके होने से जो सज जाती थी महफ़िलें
उसके बग़ैर ये शहर बड़ा गरीब लगता है

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ख़्याल कितना है.

Posted September 9, 2017 By admin

एक परवाह ही बताती है कि*
ख़्याल कितना है..!!*

वरना कोई तराजू नहीं होता*
रिश्तो में…!!!*

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हर रोज़ चुपके से निकल आते है नये पत्ते,
यादों के दरख्तों मे मैने कभी पतझड़ नहीं देखा…!

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Ristey Hindi Shayari

Posted September 5, 2017 By admin

रिश्ते जोर से नहीं., तमीज़ से थामे जाते है.

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Deep Thoughts

Posted September 5, 2017 By admin

शुक्र है कि मौत सबको आती है,वरना अमीर तो इस बात का भी मजाक उड़ाते,कि गरीब था इसलिए मर गया .

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Hindi Shayari on Life

Posted September 5, 2017 By admin

एक और शाम हो गयी, एक और दिन ढल गया,
इस ज़िन्दगी की किताब से एक और पन्ना निकल गया…!

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Motivational Hindi Shayari

Posted September 4, 2017 By admin

जब से मुझे पता चला है की मेरा आत्मविश्वास मेरे साथ है,
तबसे मैने ये सोचना बंद कर दिया की कौन मेरे खिलाफ है !!

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दिसम्बर

Posted December 9, 2016 By admin

दिसम्बर सा मैं,जनवरी सी तुम,
पास आकर भी बिछड़ जाते हैं…!

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ज़हन में छिपा हुआ था जो दर्द
गमों का मौसम आने से सम्मुख आ गया
सहसा आज हिम्मत जवाब दे गई..
आज महसूस हुआ
खुल कर आँसुओं का बहना भी निश्चिंता दे गया
इत्मिनान का शब्द कभी-कभी ख़ुद तलाशना पड़ता है
😞

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