छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था
एक नाई, एक मोची, एक काला लुहार था

छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार था
कही भी रोटी खा लेते, हर घर मे भोजऩ तैयार था

बाड़ी की सब्जी मजे से खाते थे जिसके आगे शाही पनीर बेकार था
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार था

नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था
छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

अपना घड़ा कस के बजा लेते
समारू पूरा संगीतकार था

मुल्तानी माटी से तालाब में नहा लेते, साबुन और स्विमिंग पूल बेकार था
और फिर कबड्डी खेल लेते, हमे कहाँ क्रिकेट का खुमार था

दादी की कहानी सुन लेते,कहाँ टेलीविज़न और अखबार था
भाई -भाई को देख के खुश था, सभी लोगों मे बहुत प्यार था

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

One Comment

  1. Comment by Raj Tripathi:

    छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था
    rahimchacha dete the naye kapde sil
    us waqt kahan kapdon ka Mall tha

    din bhar khelte hian Baarish mein yaron ke saath
    us waqt kahan sardi aur bukhar tha,
    aur agar ho bhia jaye to dadi ka nuksa tayar tha
    us waqt kahan doctor aur dawaiyon ka vyapar tha
    chota sa gaon mera poora Big Bazar tha

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