एक शहीद का बेटा!

मेरे दोस्तों के पापा रोज उनको स्कूल छोड़ने आते हैं
आप मुझे स्कूल छोड़ने क्यों नहीं आते हो पापा
घर की एक दीवार पर आपकी एक तस्वीर टंगी हैं
माँ आपकी तस्वीर पर रोज फूल क्यों चढाती हैं पापा
घर की पूरानी अलमारी में एक यूनीफोर्म भी लटकी हैं
माँ रोज उस यूनीफोर्म को घंटो तक क्यों निहारती हैं पापा
माँ के हाथों में कंगन नहीं खनकते और पेरो में पायल भी
इश्वर से सारा दिन माँ क्यों ऐसे लडती रहती है पापा
माँ मुझे सीने से लगाकर थपकिया देती हैं अक्सर
माँ कहती है में शहीद का बेटा हूँ ये शहीद क्या होता है पापा!!

— सुनील “सोनू”

2 Comments

  1. Ping from Manoj Negi:

    nice line yar.

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