ज़हन में छिपा हुआ था जो दर्द

ज़हन में छिपा हुआ था जो दर्द
गमों का मौसम आने से सम्मुख आ गया
सहसा आज हिम्मत जवाब दे गई..
आज महसूस हुआ
खुल कर आँसुओं का बहना भी निश्चिंता दे गया
इत्मिनान का शब्द कभी-कभी ख़ुद तलाशना पड़ता है
😞

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