homepage

सच ही कहा है पंछी इनको,

रात को ठहरें तो उड़ जाएं,

दिन को आज यहाँ कल वहाँ है ठिकाना |

बागों में जब-जब फूल खिलेंगे,

तब-तब ये हरजाई मिलेंगे,

गुज़रेगा कैसे पतझड़ का ज़माना|

परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना,

परदेसियों को है इक दिन जाना |

कोई लब्ज़ लिखु…या,
अल्फाज मेरे दिल का,..या,
युँ हीं ख़ामोश रह जाऊँ,
ऐ मोहब्बत,ऐसा समां बना,
उनके हीं रंग मे रग जाऊँ…

वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।

पहले इश्क़ को आग होने दीजिए,
फिर दिल को राख होने दीजिए…!

तब जाकर पकेगी बेपनाह मोहब्बत,
जो भी हो रहा बेहिसाब होने दीजिए…!

सजाएं मुकर्रर करना इत्मिनान से,
मगर पहले कोई गुनाह होने दीजिए…!

मैं भूला नहीं बस थोड़ा थक गया था,
लौट आऊंगा घर शाम होने दीजिए…!

चाँद के दीदार की चाहत दिन में जगी है,
आयेगा नज़र वो, रात होने दीजिए….!

नासमझ, पागल, आवारा, लापरवाह हैं जो,
संभल जाएंगे वो भी एहसास होने दीजिए…!!

हिसाब का उसूल कुछ और होता होगा…
के दो मे से एक निकालो, एक बचता है…
पर
मोहब्बत का उसूल कुछ और होता है…
यहाँ दो मे से एक निकालो तो एक भी नही बचता…

नफ़रत करते तो अहमियत बढ़ जाती उनकी
मैंने माफ़ कर के उनको शर्मिंदा कर दिया

पाँव हौले से रख कश्ती से उतरने वाले…
जिंदगी अक्सर किनारों से ही खिसका करती है…!!


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *