homepage

Kitni Dilkash Hai Khamoshi Teri…

Meri Sari Batein Fazool Hon Jaise…

हमें पसंद नहीं जंग में चालाकी यारो…
जिसे निशाने पर रखते हैं…
बता कर रखते हैं !!

मुलाकात एक मांगी थी मैंने,
नज़ाकत तो देखिये,
रखकर लिफाफे में इक फूल उसने भेजा है,गुलाब का

अपने खिलाफ बाते बड़ी खामोशी से सुनती हूँ मैं,
ऐ दोस्तों जवाब देने का ज़िम्मा मैंने वक्त को दे रखा है !!

आओ कभी हमारे दिल के डेरे पर,,
तुमसे मुहब्बत का सच्चासौदा करना है.

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था
एक नाई, एक मोची, एक काला लुहार था

छोटे छोटे घर थे, हर आदमी बङा दिलदार था
कही भी रोटी खा लेते, हर घर मे भोजऩ तैयार था

बाड़ी की सब्जी मजे से खाते थे जिसके आगे शाही पनीर बेकार था
दो मिऩट की मैगी ना, झटपट दलिया तैयार था

नीम की निम्बोली और शहतुत सदाबहार था
छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

अपना घड़ा कस के बजा लेते
समारू पूरा संगीतकार था

मुल्तानी माटी से तालाब में नहा लेते, साबुन और स्विमिंग पूल बेकार था
और फिर कबड्डी खेल लेते, हमे कहाँ क्रिकेट का खुमार था

दादी की कहानी सुन लेते,कहाँ टेलीविज़न और अखबार था
भाई -भाई को देख के खुश था, सभी लोगों मे बहुत प्यार था

छोटा सा गाँव मेरा पूरा बिग बाजार था

वो एक शक़्स मुझे अपने क़रीब लगता है
खुद से करूँ जुदा तो अजीब लगता है

ये बेक़रारी, ये बेचैनी, ये कशिश कैसी
उसका मिलना मुझे अपना नसीब लगता है

कभी मीठी सी बातें, कभी हर बात पे झगड़े
ये याराना बड़ा दिलचस्प, बे-तरतीब लगता है

मोहब्बत की मंज़िल का पता न मिल सके फिर भी
कई सदियों का रिश्ता ये मेरे हबीब लगता है

उसके होने से जो सज जाती थी महफ़िलें
उसके बग़ैर ये शहर बड़ा गरीब लगता है


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *