R.I.P SHASHI KAPOOR

सच ही कहा है पंछी इनको,

रात को ठहरें तो उड़ जाएं,

दिन को आज यहाँ कल वहाँ है ठिकाना |

बागों में जब-जब फूल खिलेंगे,

तब-तब ये हरजाई मिलेंगे,

गुज़रेगा कैसे पतझड़ का ज़माना|

परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना,

परदेसियों को है इक दिन जाना |

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